वजूद

आ, आज, एक बार फिरमिल बैठते हैं,कुछ तू हमें सुनाकुछ हम तुझे सुनाते हैं,खुशियों – गमों कोएक दूजे से साझा कर लेते हैंमेरी खुशियों की

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