एक गुज़ारिश

हम हारते कैसे नहींजहाँ जज बनकर वक़्त बैठा होऔर वकील बनकर नसीब,वहाँ हार तो निश्चित थी ।जानते हो ना !ऐसी अदालत में नियतिबड़े-बड़े हथकण्डे अपनाती हैफ़िर उस अदालत सेखाली हाथ…

देश का सौरभ रहो तुम, देश का गौरव बनो तुम

देश का सौरभ रहो तुम, देश का गौरव बनो तुम,आधुनिक तकनीक थामे, देश के प्रहरी बनो तुम .देश का सौरभ रहो तुम………….. अपना निहत्था वीर इकला, कितनी, गर्दनो को तोड़ता…

काव्यवाणी – हिंदी कविता लेखन प्रतियोगिता

Registration closed on 30th December 2020 यह प्रतियोगिता 18+ आयु के रचनाकारों के लिये है।रचनाकार किसी भी विषय पर स्वरचित कविता भेज सकते हैं |कविता हिंदी भाषा में ही मान्य…