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ऐ इंसान….. खुद को पहचान

ऐ इंसान.....! माना सच के लिए न लड़ना तेरी आदत है...पर झूठ का साथ देना तेरी फ़ितरत तो नहीं ? माना कोशिशों से घबराना तेरी आदत है ...पर दूसरों को सफल देख जलना तेरी फ़ितरत तो नहीं ? माना किसी में अच्छाइयाँ न ढूँढना तेरी आदत है...पर बुराइयों के पुल बांधना तेरी फ़ितरत तो नहीं … Continue reading ऐ इंसान….. खुद को पहचान

shallow focus of clear hourglass

कुछ पल अपने लिए

शनिवार शाम से ही सुहानी अपना काम जल्दी जल्दी ख़तम कर रही थी, बहुत दिनों बाद उसने अपने लिए वक़्त निकालने की सोची थी ….वो मन ही मन में खुश हो रही थी की कल तो वो पुरानी साड़ी से बैग बनाएगी …उसे सिलाई कढ़ाई का बहुत शोक था परन्तु घर के काम काज से … Continue reading कुछ पल अपने लिए

मेरा एक सपना है….

मेरा एक सपना है.... मैं अपने पापा जैसी बन जाऊँ जैसे वो सबकी पसंद-नापसंद का..ध्यान रख लेते हैं |वैसे ही मैं अपनी इच्छा दबाकर...सबका मन पढ़ पाऊँ ||मेरा एक सपना है.... मैं अपने पापा जैसी बन जाऊँ जैसे उनकी प्यार भरी थपकी से...मैं बचपन में सो जाती थी |उसी थपकी की आहट... मैं अपनी लोरी … Continue reading मेरा एक सपना है….

मूर्ख को सीख

एक दिन कड़ाके की ठंड पड़ रही थी | ठंड से काँपते हुए कुछ बन्दर एक पेड़ के नीचे बैठ गए | उस पेड़ पर एक चिड़िया का घोंसला था | उनमें से एक बन्दर बोला अगर कहीं से आग तापने को मिल जाए तो ठण्ड दूर हो जाए | दुसरे बन्दर ने सुझाव दिया … Continue reading मूर्ख को सीख

मैं एक किरदार अनेक

मैं हूं एक और किरदार अनेक निभाती हूं टूटे हुए फेवरेट खिलौनों को जोड़कर बिना डिग्री की इंजीनियर बन जाती हूं मैं हूं एक और किरदार अनेक निभाती हूं छोटी सी चोट लगने पर या तो' फू 'कर कर या 'चींटी मर गई' कह कर बच्चों को बहलाती हूं, कभी-कभी मैं उनकी नर्स भी बन … Continue reading मैं एक किरदार अनेक

एक मैं और एक तुम……

एहसासों की डोर से बंधे हैं दोनों।इनसे जुदा तू भी नहीं, जुदा मैं भी नहीं।। महफिलों में मिलते हैं सबसे मुस्कुराकर।सबको पता हैं खुश तू भी नहीं , खुश मैं भी नहीं।। बाँध रखा है दोनों को, अहम की जंजीरों ने।वरना खफ़ा तू भी नहीं , खफ़ा मैं भी नहीं।। भूल हो जाती है इंसानो … Continue reading एक मैं और एक तुम……