नव वर्ष

ख़ामोशी ना लेकर आए, विरह ना सताए इस सालभूख को पानी से मार, सोना ना पड़े इस सालइश्क बंद कमरे से आज़ाद हो जाए इस सालनाम अपना गगन में लहरा सकें सब इस सालये साल हमको हमसे मिला दे तो अच्छा होगाअपना पराया भेद मिटा दे तो अच्छा होगाज्ञान सागर में डुबकी लगा पवित्र कर … Continue reading नव वर्ष

एक गुज़ारिश

हम हारते कैसे नहींजहाँ जज बनकर वक़्त बैठा होऔर वकील बनकर नसीब,वहाँ हार तो निश्चित थी ।जानते हो ना !ऐसी अदालत में नियतिबड़े-बड़े हथकण्डे अपनाती हैफ़िर उस अदालत सेखाली हाथ ही लौटना पड़ता है ।देखा ना ! कैसे ?नियति ने दाँव पेंच खेलेंवक़्त ने नसीब का सुना और,हम एक-दूसरे के दिल पर हो रहेदस्तक भी … Continue reading एक गुज़ारिश

देश का सौरभ रहो तुम, देश का गौरव बनो तुम

देश का सौरभ रहो तुम, देश का गौरव बनो तुम,आधुनिक तकनीक थामे, देश के प्रहरी बनो तुम .देश का सौरभ रहो तुम………….. अपना निहत्था वीर इकला, कितनी, गर्दनो को तोड़ता है,रिपु सैन्यदल, देख तुमको, डर से भागता, रण छोड़ता है,दुश्मनों के सैनिक दलों में, अब खौफ ऐसा ही भरो तुम .देश का सौरभ रहो तुम………….. … Continue reading देश का सौरभ रहो तुम, देश का गौरव बनो तुम

ए ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगीक्यों हर पल अपने बदले रंग दिखाती होबहुत खुश है हम पर क्यों हर पल गम को रेस में जिता जाती होमाना कि खुश रहना बेशक हर कोई चाहता हैपर क्यों उस खुशी के सागर में अपने गम के आंसू ले आती होक्यों हमें हर एक पल में एक नया लेसन सिखाती होक्यों कुछ … Continue reading ए ज़िन्दगी

तब तकलीफ होती है..

जब अपने, आंखों के सामनेहोते हुए भी दूर हो जाते हैंतब तकलीफ होती है जब प्यार की जगहपैसों की कीमत बढ़ जाती हैतब तकलीफ होती है जब रिश्तो की खनक सेमहकते आंगन में तकरार होती हैतब तकलीफ होती है जब अपने भी बेगानों कीकतार में खड़े हो जाते हैंतब तकलीफ होती है जिस घर के … Continue reading तब तकलीफ होती है..

आस्था और विश्वास

न करूं परिभाषित "आस्था" को कभीन "विश्वास" पर ही कोई सवाल करना।हृदय में जोत जलाई है जो तुमनेमौन से रुठकर, न उस पर बवाल करना।।दिया और बाती का अद्भुत गठबंधनभाव का शब्दों के संग, सुसज्जित संगमसांझ वेश में धरा का, गगन को आलिंगनसाए से लिपटते निज अंश को मां का चुम्बन।हर कर्म में "आस्था" है … Continue reading आस्था और विश्वास

वजूद

आ, आज, एक बार फिरमिल बैठते हैं,कुछ तू हमें सुनाकुछ हम तुझे सुनाते हैं,खुशियों - गमों कोएक दूजे से साझा कर लेते हैंमेरी खुशियों की पोटलीतेरे अंदर ही तो कैद रहती हैमेरे गमों की चितातेरे अंदर ही तो सुलगती है। तुझ बिन मैं, मुझ बिन तेरी भीधक धक, कैसे कहां, आगे बढ़ती हैओढ़ लेते हैं … Continue reading वजूद

वो हसीन शाम …

लोग पुछते हैं हम से आप क्या सोचते रहते हो आज कल?क्या बतायें उनको क्या है इस दिल में हर पल ?क्या जाने वो जिनके दामन में उस चाँद का नूर तक नहीं,जिस चाँद को इन हाथों से छूकर आए हम उस पल उस शाम की नमी आज भी हमारे साँसों में है,उस झील की … Continue reading वो हसीन शाम …

भूले बिसरे गाँव के लम्हें

वह गाँव आज भी बसता है मेरे भीतर, उसी गलियारों में बीता सुनहरा बचपनघर की दहलीज को लांघता अल्हड़पन, माँ की हिदायतों को न मानता था मन कभी रेत के ऊँचे-ऊँचे टीलों पर चढ़ते, कभी नदियों के साथ ही हिलोरें मारतेपतंग के साथ साथ हवा से होड़ लगाते, तितली को पकड़ने पर रंग में रंग … Continue reading भूले बिसरे गाँव के लम्हें

जिन्दगी का सफ़र

कदर करो जिन्दगी कीजिन्दगी नही मिलेगी दुबाराक्या खोया,क्या पायाये जिन्दगी मे कोई नही जान पायाजिन्दगी मे चलते-चलतेथक ना जाना दोस्तोकदर करो इस जिन्दगी कीथाम लो हाथ जिन्दगी का दोस्तोदोस्तो जिन्दगी मे क्या मिलाक्या खोया,क्या पायाइस चकर से बाहर आओखओ-पियो और मौज मनाओजिन्दगी का सफ़र बहुत ही सुहानाइसे खुशी मे जियोगम मे मत उड़ानाजिन्दगी के सफ़र … Continue reading जिन्दगी का सफ़र