“आदमी की औकात” – दिवंगत जैन मुनि तरुण सागर जी द्वारा रचित कविता

फिर घमंड कैसाघी का एक लोटा,लकड़ियों का ढेर,कुछ मिनटों में राख…..बस इतनी-सी हैआदमी की औकात !!!! एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया,अपनी सारी ज़िन्दगी,परिवार

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मन के हारे हार है.. मन के जीते जीत..

मन के हारे हार है मन के जीते जीत ।कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत ॥ एक बार एक चिड़िया अपने बच्चों के

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मंत्री का चुनाव — प्रेरक कहानी (भाग -1)

एक बार एक राजा को अपने दरबार के लिए मंत्री का चयन करना था। आस पास के गांव से बहुत सारे लोगों ने मंत्री पद

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