मन की कल्पना

मन की कल्पना

  • मुझे चाह नहीं कि आसमान में उड़ सकूँ
  • काबिल इतनी बनूँ की जमीं से जुड़ सकूँ
  • मेरे अरमान नहीं बुलन्दियों को छूने की
  • इतना सा ख्वाब अपनों के दिल में रहने की
  • इतना ना करूँ कुछ कि अभिमान आ जाए
  • यहीं हैं लक्ष्य लोगों के बीच सम्मान पा जाए
  • करुणा हो ह्रदय में ,ताकि सुख बाँट सकूँ
  • सहनशक्ति हो मन में ,तो दुःख काट सकूँ
  • जो जरूरतमंद हैं उनका करूँ सहयोग
  • अब इतना बनना हैं मुझे सुयोग्य
  • बस यहीं हैं मेरे अंतस मन की कल्पना
  • मानवता की सेवा ही एकमात्र सपना
  • उठो जागो और करो सपना साकार
  • तभी मिलेगा मन की कल्पना को आकार

Written By Meetu Jain

Published as received by Participant Author

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