March 4, 2021

उम्मीद नए साल की….

साल आता है साल जाता है
अपनी यादें छोड़ जाता है।
खुशी के पल से ज्यादा टीस
छोड़ गया है साल बीस।।

देश ही नहीं पूरे विश्व में
इस साल मातम है छाया।
ऐसी आयी यह महामारी
कोई इसका तोड़ न पाया।।

चारों और आतंक सा छाया
जाने किसपे पड़े उसकी छाया।
कब किसका किससे साथ छूटे
कौन है जो दुःख दर्द पूछे।।

कैसी है लाचारी छाई
कोई व्यापार कोई नौकरी गवाई ।
छाई चारों ओर से विपदा
ईश्वर ही अब करें सहाई ।।

हमारा ईश्वर से है कहना
यह कोरोना का रोना ।
अब साल 2021
ऐसा ना होना….।।

Written By: Ms. Smriti Goyal

(Published as received from writer)

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