नव वर्ष

ख़ामोशी ना लेकर आए, विरह ना सताए इस साल
भूख को पानी से मार, सोना ना पड़े इस साल
इश्क बंद कमरे से आज़ाद हो जाए इस साल
नाम अपना गगन में लहरा सकें सब इस साल
ये साल हमको हमसे मिला दे तो अच्छा होगा
अपना पराया भेद मिटा दे तो अच्छा होगा
ज्ञान सागर में डुबकी लगा पवित्र कर खुदको
सभी साथ बढ़ेंगे तो अच्छा होगा
इस साल कुछ नए अनुभव मीठे कुछ कड़वे होंगे
कुछ झूट मीठे सच कुछ कड़वे होंगे
नया साल सबको नई राह दिखायेगा
राह में कहीं फूल तो कहीं कांटे होंगे
नव वर्ष में नई सोच को प्रोत्साहन देंगे यदि
आगे बढ पाएंगे तो ही हम
दुंध न हटा पाए आंखों का इस बार भी यदि
तो डरने लग जाएंगे हम उजाले से |

Written By : Mr. Wyuttpanna Singwal

(Published as received by writer)

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