मंत्री का चुनाव — प्रेरक कहानी        (भाग -1)

मंत्री का चुनाव — प्रेरक कहानी (भाग -1)

एक बार एक राजा को अपने दरबार के लिए मंत्री का चयन करना था। आस पास के गांव से बहुत सारे लोगों ने मंत्री पद के लिए आवेदन दिया। कठिन परीक्षा के बाद तीन नवयुवकों को चुना गया और उन्हें राजा से मिलाने राजदरबार ले जाया गया। राजा ने तीनो युवकों को अपना अपना परिचय देने को कहा |

पहला युवक – महाराज मेरा नाम रवि है। मेरी माँ ने मुझे पढ़ाने के लिए बहुत कठिन परिश्रम किया है। दूसरे युवक ने अपना नाम सोमेश बताया और कहा कि पिता के देहांत के बाद उसकी माँ ने उसे चोरी कर के पढ़ाया है। तीसरे युवक ने भी इसी प्रकार राजा को बताया कि उसका नाम मंगल है और उसकी माँ ने उसे भीख मांग-मांग कर पढ़ाया है।


राजा ने तीनों की बुद्धिमता को परखने की लिए उनसे अनेक सवाल किए, पर सभी ये देख कर अचंभित थे कि तीनों युवक अत्यंत बुद्धिमान और समझदार थे। कोई भी किसी से कम नहीं था। राजा भी परेशान था कि तीनों में से किसे मंत्री पद के लिए नियुक्त किया जाए।
राजा ने कुछ सोचा फिर सेवक को आदेश दिया कि तीनों युवकों को सम्मान पूर्वक अलग अलग कक्ष में बैठाया जाए|

राजा ने फिर सेवक को बुलाकर कहा प्रत्येक युवक को तीन विभिन्न प्रकार के गिलास में शरबत प्रस्तुत किया जाए जिसमे एक गिलास सोने का, एक गिलास कांच का और एक गिलास मिट्ठी का हो। सेवक ने राजा के आदेश अनुसार तीनों युवकों को तीन अलग अलग तरह के गिलास में शरबत परोसा।
राजा के पूछने पर सेवक ने बताया कि रवि ने सोने का , सोमेश ने कांच का और मंगल ने मिट्ठी का गिलास उठाया था। राजा ने बिना देर किए तीनों युवकों को बुलाया और सोमेश को मंत्री पद पर नियुक्त कर दिया। सभी दरबारी और सभासद राजा के इस फैसले से हैरान थे कि राजा एक चोर के बेटे को मंत्री कैसे घोषित कर सकते हैं?

राजा के इस निर्णय का कारण जाने कहानी के अगले भाग में………….तब तक

हमें कमेंट करके जरूर बताये कि राजा ने सोमेश को मंत्री क्यों चुना होगा? साथ ही ये भी बताये कि यदि आप राजा के स्थान पर होते तो आप किसे चुनते और क्यों?

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