सोफे की कहानी मेरी जुबानी

पहचाना मुझे अरे मैं ज्यादातर सबके घरों में मिलता हूं |अभी भी नहीं पहचाना अरे वही जिस पर बैठकर आपकी यह ब्लॉगर क्वीन बढ़िया-बढ़िया ब्लोग्स लिखती है |हां वही अब सही पहचाना आपका प्यारा न्यारा सोफा…

I have read it somewhere that According to the Oxford English Dictionary, the word ‘sofa’ originates in the eastern Mediterranean with the Arabic soffah, which is ‘a part of the floor raised a foot or two, covered with rich carpets and cushions, and used for sitting upon.’

But आप लोगों के लिए तो सोफा stands फॉर Sabse bhadiya Option जिस पर Failo Aaram से…क्यों है ना… हां दोस्त बिल्कुल फैलो आराम से भाई तुमने पैसा जो खर्च किया है but कभी हमारे बारे में भी तो सोचो.

अरे आप तो बुरा मान गए ,मैं तो उन लोगों की बात कर रहा था जो ज्यादा मेहमान आने पर थोड़ा-थोड़ा खिसक कर बोलते हैं आओ बैठो बहुत जगह है|मेरी आवाज उन तक पहुंचती नहीं मैं चिल्ला चिल्ला कर बोलता हूं भाई 8-10 को और लिया बहुत जगह है|

सबसे खतरनाक होते हैं वह आशिक जिनका दिल टूटा हो …पूरी रात मुझे आंसुओं से गीला करते हो ,तुम तो आंसू बहा कर सो जाते हो और तुम्हारे नमकीन आंसुओं का स्वाद मुझे चखना पड़ता है …रहम करो भाई

अगर कारपेंटर ने मुझे दांत दिए होते ना जो शैतान बच्चे कभी sauce के कभी jam के हाथ पोछ लेते हैं तो उनकी खैर ना होती|
कुछ लोग तो मुझे सजाने के लिए रखते हैं बहुत बोर हो जाता हूं उनके घर, और कुछ ने तो मुझे लॉन्ड्री बॉस्केट समझ लिया है मैले कुचैले कपड़े रख देते हैं, भाई मेरी भी तो कोई इज्जत है|

मुझे जरूर बताना आप कौन से वाले सोफा यूजर हो चलो दोस्तों मैं चलता हूं बाय ,मैडम आ गई है ब्लॉग लिखने….📖🖋

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