बेटी – राजकुमारी से रानी तक का सफर

गुड्डो! ओ गुड्डो! जल्दी से चाय बना, देख तेरी पसंद की जलेबी और कचौरी लाया हूँ, शेखर जी दरवाज़े पर दोनों हाथों में सामान लिए

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